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Motivational Stories of Swami Vivekananda | स्वामी विवेकानंद जी के कुछ बेहद प्रेरक प्रसंग

स्वामी विवेकानंद जी के मोटिवेशनल किस्से (Motivational Stories of Swami Vivekananda): स्वामी विवेकानंद जी का 09/11 का ओजस्वी भाषण जिसके बारे में आपने जरूर सुना होगा। वह 1893 का विश्व धर्म सम्मेलन जो शिकागो में हुआ था जिसमे विवेकानंद जी ने भारत का परिचय पूरे विश्व को कराया था।

आज लोग 09/11 को ओसामा बिन लादेन द्वारा अमेरिका ट्विन टावर पे हमले को लेकर ज्यादा याद रखते हैं। लेकिन भारत को 09/11 पर गौरव करना चाहिए जो हमे स्वामी विवेकानंद जी के कारण प्राप्त हुआ।

शिकागो धर्म संसद में स्वामी जी को अंत मे मात्र 2 मिनट का समय दिया गया था, लेकिन जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो पूरा प्रांगण Pin Drop Silence के साथ डेढ़ घंटे उन्हें सुनता रहा और तालियां बजाता रहा। वो पहला मौका था जब Western World का परिचय किसी भारतीय विद्वान महापुरुष से हुआ था। जिसने पूरे विश्व को असली भारत से परिचित कराया था।

09/11 Swami Vivekanand के अलावा उनके जीवन के कई किस्से हैं जो हमे प्रेरणा देते हैं। तो चलिए इस लेख में बात करते हैं कुछ ऐसे ही अनसुने किस्से, स्वामी विवेकानंद जी के बारे में (Motivational Stories of Swami Vivekananda)-


ट्रेन में कुछ शरारती लड़कियां

एकबार विवेकानंद जी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, गेरुवे वस्त्र में देखकर कुछ अंग्रेज लड़कियों ने उनके हाथ मे पहनी घड़ी देखकर लालच में आ गई।

उन्होंने विवेकानंद जी के पास जाकर कहा “हे साधु ये घड़ी मुझे दे दो नही तो हम शोर मचाएंगे की तुम हमे छेड़ रहे हो.

विवेकानंद चुप रहे कुछ नही बोले।

लड़कियों ने फिर कहा घड़ी दे दो साधू नही तो शोर मचा देंगे।

विवेकानंद ने बुद्धि के तुरंत इस्तेमाल करते ऐसा दिखाया कि वो सुन नही सकते लेकिन पढ़ सकते हैं। लिख के बताओ।

लड़कियों ने कहा अच्छा बहरा है, उन्होंने पेपर निकाला उसपे लिख के दिया की साधु घड़ी दे दे वरना शोर मचा दूंगी की तू हमे छेड़ रहा था।

विवेकानंद जी ने वो पेपर जेब मे रखा और बोले- जाओ अब शोर मचाओ मैं पुलिस को ये दिखा दूँगा।

“Girls Shocks Vivekanand Rocks”


Photographic Memory of Swami Vivekanada

एकबार विवेकानंद जी अमेरिका के अंदर एक समुद्री बोट से यात्रा कर रहे थे। कप्तान बोट चला रहा था और उसके पास में न्यूज़ पेपर पड़ा था।

विवेकानंद जी ने आग्रह किया कि वो अखबार पढ़ लें क्योंकि अभी आप नही पढ़ रहे। उसने कहा ठीक है पढ़के वापस कर देना क्योंकि मैंने अभी पढ़ा नही।

हुआ यूं कि पढ़ते हुए तेज हवा के कारण न्यूज़ पेपर विवेकानंद जी के हाथ से छूटकर पानी मे गिर गया। कप्तान बहुत गुस्सा हुआ।

विवेकानंद जी ने कहा रुको मैं कुछ करता हूं। उन्होंने पेन पेपर निकाला और आधे घंटे कुछ लिखते रहे। और लिखने के पास खुन्नस खाये कप्तान के पास गए बोले ये लो न्यूज़ पेपर में जो कुछ था वो सब मैंने इसमे लिख दिया है।

कप्तान की बुद्धि घूम गई, बोला ये कैसे संभव है, उसने बाद में न्यूज़ पेपर की कॉपी से मिलाया तो सब कुछ हूबहू लिखा था विवेकानंद जी ने। दरसअल उनके पास फोटोग्राफिक मेमोरी थी, जो भी देखते पढ़ते थे वो उनके मस्तिष्क में चित्रांकित हो जाता था।


Tit for Tat Attitude of Swami Vivekananda

उन दिनों अंग्रेज भारतीयों से बहुत चिढ़ते थे। इसी क्रम में ट्रेन यात्रा के दौरान एक अंग्रेज ने विवेकानंद जी का जूता उठाकर एक अंग्रेज ने खिड़की के बाहर फेंक दिया।

विवेकानंद जी देख रहे थे लेकिन कुछ बोले नही।

अंग्रेज सोचा ये गेरुवाधारी डर गया, इतना रौब है मेरा, ऐसा सोचते हूए वो सो गया। विवेकानंद जी ने उसका कोट और टोपी जो बगल में रखा था अंग्रेज ने, उसे खिड़की से बाहर फेंक दिया।

जब अंग्रेज उठा वो इधर उधर देखने लगा, मिला नही। विवेकानंद जी से पूछा मेरा कोट और हैट देखा क्या ??

विवेकानंद जी ने मुस्कुराते हुए जबाव दिया, हाँ दरसअल वो दोनो मेरा जूता ढूढंने गए हैं।

“अंग्रेज Shocks विवेकानंद जी Rocked”

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Britain’s PM & Swami Vivekanada on Lunch Table

स्वामी जी को एकबार ब्रिटेन के PM ने Invite किया, वो उस समय लंदन में ही थे।

लंच टेबल पर सब लोग छुरी कांटे से खाना खा रहे थे, स्वामी जी हाथ से खाना खाने लगे। ब्रिटेन के प्राइम मिनिस्टर से रहा नही गया, उसने पूछा इतने मॉडर्न परिवेश में रहने के बावजूद आप हाथ से खा रहे हैं? ये क्या तरीका हुआ कम से कम चम्मच से खाओ।

स्वामी जी ने जबाव दिया “Because No One Has Eaten from my Hand Before Me”

इसका हिंदी मतलब हुआ कि “मेरे हाथ से किसी और ने कभी नही खाया है, ये किसी और का जूठा बिल्कुल नही है”

ब्रिटेन के PM दंग रह गए कि जिस देश को अंग्रेजों ने गुलाम बना रखा है वहाँ इतने ज्यादा बुद्धिमान लोग रहते हैं।


Swami Vivekanada’s Decency Towards Women

स्वामी विवेकानंद जी महिलाओं का बड़ा आदर करते थे. अमेरिका में एक यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने पहुँचे स्वामी जी। वहाँ पर एक महिला उनसे बहुत अधिक प्रभावित हो गई, उनपे पूरी तरह आकर्षित हो गई थी।

बातचीत के दौरान उंस लड़की ने स्वामी जी से मिलने की कोशिश की, और उनसे कहा:

मैं आपसे बहुत प्रभावित हूँ, क्या आप मुझे अपने जैसा एक पुत्र दे सकते हैं? मुझसे शादी कर लीजिए और एक बच्चा मुझे दे दीजिए जो आपके जैसा हो।

स्वामी जी ने कहा: “बस इतनी सी बात, इसके लिए शादी की क्या आवश्यकता है ये तो बिना शादी के संभव है”

लडक़ी सोचने लग गई की ये तो और भी अच्छा है, लेकिन स्वामी जी ने टोकते हुए कहा “आपको मेरे जैसा बच्चा चाहिए लेकिन इसकी कोई गारंटी नही जो हमारी संतान उत्पन्न होगी वो मेरे जैसी ही हो, लेकिन दूसरा तरीका है जिससे तुम्हे हूबहू मेरे जैसा बेटा मिल सकता है।

लड़की ने पूछा वो कैसे?

स्वामी जी- आप मुझे ही अपना बेटा बनालो, आज से मैं आपको माँ का दर्जा देने को तैयार हूं।

“ऐसी सोच उसी की हो सकती है जिसकी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण हो, और स्वामी जी का अपनी इंद्रियों पूर्ण नियंत्रण था”

आगे चलकर ये लड़की स्वामी जी परम शिष्य बनी।


SUPER इंटेलीजेंट स्वामी जी (Motivational Stories of Swami Vivekananda)

स्वामी विवेकानंद जी इतने अधिक बुद्धिमान थे कि सुभाषचंद्र बोस ने एकबार कहा था ” यदि स्वामी जी जिंदा होते तो मैं उनके चरणों मे रहता”

एकबार एक अंग्रेज ने उन्हें बुलाया, और उनकी बेइज्जती करनी चाही। उसने कई सारी किताबो को एक क्रम में एक के ऊपर एक रखके दिखाया। सबसे नीचे भगवत गीता रखी और सबसे ऊपर बाइबिल।

अंग्रेज ने कहा देखो इतनी सारी किताबों का अध्ययन कर चुका हूं मैं, सबसे ऊपर बाइबिल है क्या समझे? सही क्रम में रखा है न मैंने इन्हें?

स्वामी जी ने कहा हाँ बिल्कुल सही क्रम लगाया है आपने। भगवत गीता को सबसे नीचे रखकर ठीक किया, क्योंकि यही वो किताब है जो बाकी सभी किताबो की फाउंडेशन है।

भागवत गीता ही सभी की नींव है उसे हिलाया तो बाकी सभी किताबे अस्त व्यस्त हो जाएगी, जब तक फाउंडेशन अच्छी है दुनिया चलती रहेगी।

अंग्रेज बेचारा Shocked हो गया और स्वामी विवेकानंद जी पुनः Rocked।


Laser-Focused Personality- (Motivational Stories of Swami Vivekananda)

स्वामी विवेकानंद जी इतने फोकस्ड थे इतने फोकस्ड थे कि ये दुनिया भूल जाते जाते जब कुछ पढ़ रहे हो तो।

एकबार तो ये किताब पढ़ने में इतने लीन थे कि इनके सामने से पूरी गाजे बाजे के साथ एक बारात निकल गई और इनका ध्यान नही टूटा।

एक किस्सा ये भी है कि एक दिन पढ़ते पढ़ते बेहोश हो गए, घर वालों ने जगाया तो पता चला कि तीन दिन से लगातार एक के बाद एक किताबे पढ़ चुके थे, और इन्हें खुद नही पता चला कि तारीख 3 दिन आगे निकल गई। खाना न खाने की वजह से अचेत हो गए थे।


अंग्रेज प्रोफेसर और स्वामी विवेकानंद जी

एकबार अमेरिकन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान के वाक्या हुआ। एक प्रोफेसर इतने काफी चिढ़ता था।

संयोग से कैफ़ेटेरिया में लंच के दौरान वही प्रोफेसर लंच कर रहा था, विवेकानंद वही खाना लेकर उसके पास वाली टेबल पर बैठ गए।।

अंग्रेज प्रोफेसर ने कहा: “Pig don’t Sit Next to Swan” यानी सुवर कभी हंस के बगल नही बैठा करते।

विवेकानंद Replies: “Ok Sir Then I will Fly Away” ठीक है सुवर हंस के बगल नही बैठते, ठीक है तो मैं उड़ जाता हूं।

प्रोफेसर ने स्वामी जी को सुवर बोलना चाहा और विवेकानंद जी ने एक शब्द की हेराफेरी करके प्रोफेसर को ही सुवर बोल दिया। सारे स्टूडेंट्स हसने लग गए, और वो प्रोफेसर तब से और चिढ़ने लगा ।


विवेकानंद जी का पहनावा

आप सभी जानते हैं स्वामी जी हमेशा गेरुए रंग की ढोती पहनते थे। शिकागो संम्मेलन के दौरान उनसे पूछा गया:

“कि आप इंडियन लोग हमारी तरह अच्छे कपड़े पहनकर Gentleman क्यों नही बन जाते??”

इसके बाद स्वामी जी का जबाव सुनकर सभी भौचक्के रह गए:

वो बोले “आपके यहाँ एक Tailor (दर्जी) आपको Gentleman बनाता है, और हमारे यहाँ आपका Character (चरित्र) आपको Gentleman बनाता है”.


अंग्रेजी लाइब्रेरियन और विवेकानंद

List of Motivational Stories of Swami Vivekananda, one story is this– किस्सा ऐसा है कि स्वामी जी लाइब्रेरी जाते सुबह में किताब borrow करते शाम को लौटा देते। ऐसे रोजाना करते, तो एक दिन लाइब्रेरियन ने टोका: कि तुम इंडियंस, जब पढ़ना नही होता तो मजे लेने के लिए किताब क्यों ले जाते हो?

विवेकानंद बोले: मैं सब पढ़ने के बाद ही लौटाता हूँ।
लाइब्रेरियन: असंभव, इतनी मोटी किताब एक दिन में? Do You Think I am Fool?
विवेकानंद: नही मैं सब पढ़ लेता हूँ।

तो लाइब्रेरियन ने सोचा इसका टेस्ट लेती हूं, उसने वो कई किताबें निकाली जो विवेकानंद पढ़के लौटा चुके थे।

उसमे से Random Book में से Random Chapter से प्रश्न पूछना शुरू किया।

विवेकानंद जी न सिर्फ उसका उत्तर देते बल्कि यह भी बता देते की वो कौन से page number से वह प्रश्न पूछ रही है।

ऐसी Photographic Memory थी स्वामी जी के पास। एकबार पढ़ी किताब उनके मस्तिष्क में प्रिंट हो जाती थी।


मेवाड़ के राजा और विवेकानंद

विवेकानंद जी के अनसुने किस्सों मे से एक किस्सा ये है की एकबार मेवाड़ के राजा ने स्वामी जी invite किया, वहाँ इन्होंने देखा कि इनके सम्मान में या यूं कह लो राजशी ठाटबाट में, कुछ स्त्रियों नृत्य पेश कर रही थी।

इनको बुरा लगा ये उठकर चले गए सभा से। इन्होंने कहा कि-

This is Indecent to see Women Dancing in front of for your own Fun”

अपने मनोरंजन के लिए स्त्रियों को नाचते हुए देखना कोई सभ्य कार्य नही है.

इसीलिए इन्होंने नियम भी बनाया था इनके ब्रह्मचर्य आश्रम में स्त्रियों के प्रवेश पूर्णता वर्णित था।

“These were 11 Motivational Stories of Swami Vivekananda, based on his life events.”


स्वामी विवेकानंद जी के तीन मूलमंत्र है जिन्हें हर किसी को अपने जीवन मे अप्लाई करना चाहिए:

1. Don’t forget who is Helping you
(जिसने आपकी मदद की उसको कभी भूलना नही)

2. Don’t Hate who Loved You
(जिसने आपको प्यार दिया उससे कभी नफरत नही करना)

3. Don’t Cheat Who Believed You
(जिसने आप पे विश्वास किया उसे कभी धोखा मत देना)

Read MoreSwamy Vivekananda’s Quotes and Teachings

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