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लोकप्रिय हिंदी कहावतें

लोकप्रिय 30 मजेदार और तार्किक हिंदी कहावतें

जो लोग 80-90 दशकों में पले बढ़े हैं उन्होंने काफी मजेदार और तार्किक कहावते सुनी होगी अपने माता पिता से और दादा दादी नाना नानी से। आज के समय मे भी उन कहावतों और मुहावरों का कोई तोड़ कोई काट नही है, वो आज भी उतने तर्कसंगत और प्रेरणादायक लगते हैं।

कहावत का अर्थ: कहावते हमारे समाज में प्रचलित अति महत्वपूर्ण और संक्षिप्त कथन हैं जो छोटे से वाक्य में काफी गूढ़ अर्थ लिए होते हैं। वास्तव में कहावतें समाज का दर्पण होती है और रोजमर्रा की बातचीत को रुचिपूर्ण बना देती हैं।

दरअसल कहावतें और मुहावरें मनोरंजन के लिए नही बल्कि समाज को अच्छी शिक्षा और सामाजिक ज्ञान और परिवेश को जानने समझने का बेहतरीन जरिया हुआ करती थी। कहावतें सिर्फ हिंदी ही नही अन्य भाषाओं में भी प्रचलित है, हर क्षेत्र हर देश में अलग अलग तरह की कहावतें और मुहावरे प्रचलित हैं जिनमे से काफी आप रोज सुनते होंगें, यहाँ पर आपको कुछ ऐसे चुनिंदा और मजेदार कहावतें बताएंगे जो आपने शायद ही सुनी हो।

बाज के बच्चे मुंडेर पे नही उड़ा करते: जब आपको कोई ऊंचा उदाहरण देना हो तो आप इस कहावत का प्रयोग कर सकते हैं, जैसे बाज हमेशा ऊँचा उड़ने वाला पक्षी होता है, इसलिए कहते बड़ा सोचने वाले छोटी छोटी चीजों के बारे में नही सोचते।

वर जीत लिया कानी, वर भावर घूमे तब जानी: ये अवधी को काफी मशहूर कहावत है,जब कोई बेमेल संबंध बनते है तब कहते है। अर्थात रिश्ते हमेशा बराबर में बनने चाहिए तभी लंबा चल सकेगा।

अपने जोगी नंगा तो का दिए वरदान: अर्थात जोगी के पास खुद को पहनने के लिए नही वो आपको क्या देगा, जब आपसे कोई कुछ मांग करे और आप सक्षम न हो तब आप ये कहावत मार सकते हैं। मैथिली भोजपुरी की प्रसिद्ध कहावत है ये।

पांव गरम पेट नरम और सिर हो ठंडा तो वैद को मारो डंडा: इसमे किसी को डंडा नहीं मरना है बस कहने का अर्थ यह है कि पाँव गरम है और पेट नरम यानी साफ और सर ठंडा है यानी बुखार न हो तो आप स्वस्थ हैं।

घी खाया बाप ने सूँघो मेरा हाथ: जब कोई दुसरो की ख्याति पे उतावला हो या दूसरों के काम को अपने लिये डींगे मारे तो आप ये कहावत दाग सकते हैं की बाप ने घी खाया तो अपना हाथ क्यों सुंघा रहे हो।

चिकने घड़े पे पानी नहीं ठहरता: मतलब बेशर्म को कुछ भी कहो एक कान से सुनेगा दूसरे से निकाल देगा।

चोर उचक्का चौधरी, कुटनी भई परधान: कहने का तातपर्य यह है कि सत्ता अयोग्य हाथों में है।

जब आया देही का अंत जैसा गदहा वैसा संत: मृतयु के समय सब की एक समान स्थिति हो जाती है, इसलिए ऊँच नीच का भेदभाव नही करना चाहिए।

अपने बेरों को कोई खट्टा नही कहता: मतलब कोई भी अपनी बुराई स्वयं नही करता और न ही देख पाता है।

कर्महीन खेती करे बैल मरे पत्थर परे: जो व्यक्ति कर्म करना नही चाहता उसके लिए स्थिति हमेशा विपरीत हो जाती है।

अफलातून का नाती: खुद को ज्यादा ही महत्व देना।

भेड़ जहाँ जाएगी वहीं मुड़ेंगी: सीधा साधा व्यक्ति हमेशा ही ठगी का शिकार हो जाता है। यहाँ पे मुड़ेंगी से तात्पर्य सिर्फ मुड़वाने से है।

ओस चाटने से प्यास नही बुझती: आवश्यकता से कम प्रयास करने से सफलता कभी नही मिल पाती ये इस मुहावरे का मूल अर्थ है।

अंधो का हाथी: हर किसी चीज का अपूर्ण ज्ञान रखने वाले को जो हर बात में ज्ञान बघारे उसे कहते हैं अंधो का हाथी।

अंडे सेवे कोई लेवे कोई: इसके शाब्दिक अर्थ पे जाए तो मुर्गी के अंडे कोई पालता है लेकिन स्वाद कोई और लेता है, वास्तविक अर्थ हुआ कि किसी और कि मेहनत का फल किसी और को मिल जाना।

अपना रख पराया चख: ये उस व्यक्ति पे लागू होता है जो अपना सामान अपने पास होते हुए भी दूसरों से मांग के इस्तेमाल करे।

अबकी अबके साथ जबकि जब के साथ: इस मुहावरे का तात्पर्य यह है कि व्यक्ति को वर्तमान में जीना चाहिए, भविष्य का भविष्य पे छोड़ देना चाहिए।

अपना ढेढर देखे नही दूसरे की फुल्ली निहारे: ये कहावत उनपे लागू होती है जो अपने बड़े बड़े ढेर सारे दुर्गुण नही देख पाते हैं और दूसरों में छोटे छोटे खोट निकालते रहते हैं।

अपनी चिलम भरने को मेरा झोपड़ा जलाते हो: मतलब अपने छोटे से फायदे या काम के लिए दूसरों का भारी भरकम नुकसान कर देना।

अरहर की टटिया गुजराती ताला: गांव में पहले लोग अरहर के सूखे पौधे और बॉस की डंडियों से दरबाजे बनाते थे, उसी पे कहा गया है अरहर की टटिया गुजराती ताला, मतलब छोटे से आयोजन या काम के लिए फालतू का तामझाम करना।

मन मन भावे, मुड़िया हिलावे: इसका का अर्थ ये है कि अंदर मन मे लडडू फुट रहे हो और बाहर से न नुकर कर रहा हो। कुछ व्यक्ति अंदर से तो खुश हो रहे होते हैं लेकिन फॉर्मेलिटी के लिए ऊपर से न नुकर करते रहते हैं।

खेत खाये गदहा मार खाये जोलाहा: ये कहावत उत्तर भारत में काफी प्रचलित है। इसका वास्तविक अर्थ है किसी और कि गलती की सजा किसी और को मिल जाना।

घी का लडडू टेढ़ा ही भला: यानी काम के व्यक्ति में छोटा मोटा खोट नही देखा जाता।

ये कुछ ऐसी मजेदार कहावतें है हमने आपके साथ साझा की, यदि आपकी community में प्रान्त पे कुछ अनोखी और मजेदार ज्ञानवर्धक कहावतें हैं जो आप शेयर करना चाहें तो यहाँ पे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताएं ।

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