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छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी 20 रोचक जानकारियां

20 Inspirational Qualities of Veer Shivaji

छत्रपति शिवाजी की माता जीजाबाई ने बचपन से भागवत गीता महाभारत रामायण की गाथाएं सुनाया करती थी जिसका असर ये हुआ कि बचपन से ही उनके अंदर एक स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ।

शिवाजी का संक्षिप्त जीवन परिचय
शिवाजी का जन्म: 19 फ़रवरी 1630, को शिवनेत्री में हुआ
मृत्यु : 3 April 1680, Raigad Fort
Height: 1.68 m ( ५ फुट ५ इंच)
राज्याभिषेक: 6 June 1674

चलिए बात करते हैं उनसे जुडी कुछ छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी रोचक जानकारियां और बातें जो हमें प्रेरणा देती हैं

1. छत्रपति शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व इतना महान था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी एक किताब में लिखा है

“शिवाजी हवा से बने हैं हो सकता है कि उनके दो पंख भी हों क्योंकि ऐसा कैसे संभव है कि एक शख्स एक ही समय मे दो दो जगह है कैसे मौजूद हो सकता है. ऐसा लगता है कि शिवाजी ग्रीक पौराणिक गाथाओ में मौजूद हरक्यूलिस से भी ज्यादा शक्तिशाली हैं”

2. शिवाजी महाराज गुरिल्ला युद्ध मे माहिर थे और मुगलों पर घात लगाकर हमला करते थे. उनका नेतृत्व इतना कुशल था कि कुछ सौ सैनिक मुगलों की हजारों की सेना को काट डालते थे।

3. छत्रपति शिवाजी का सिर्फ नाम सुनकर मुगलों की सेना खौफ मे आ जाती थी।

4. उनका मैनेजमेंट इतना कुशल था कि मुगलों की तुलना में 10% सैनिक लेकर भी उनकी नाक में दम कर रखा था।

5. समर्थ रामदास जी छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु थे: एकबार शिवाजी उनके पास गए और बोले कि राजकाज संभालना कितना मुश्किल काम है मैं युद्ध और राज दोनो कैसे कर पाऊंगा।

तब उन्होंने कहा कि ऐसा करो राजपाट मुझपे छोड़ दो मैं देख लूंगा आज से मैं राजा हूँ। इसके बाद उन्होंने शिवाजी से कहा चूँकि मैं अब राजा हूँ इसलिए क्या मेरे आदेश का पालन करोगे छत्रपति?

वो बोले गुरुदेव आप आदेश करें आपके लिए मैं कुछ भी कर जाऊंगा, तो उन्होंने कहा आपको प्रजा का खयाल रखना है. एक कार्यकारी राजा की तरह हालांकि राजा तो मैं ही हूँ। और इसके बाद से शिवाजी एक भी युद्ध नही हारे क्योंकि उनको गुरु को जबाव भी तो देना था।

आइये जानते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी जानकारियां और रोचक बातें –

6. शिवाजी के कुछ पक्के उसूल थे-

  • किसी के धर्म का अपमान नही करना,
  • किसी भी स्त्री का अपमान नही करना।
  • इन्होंने अपनी सेना में ये उसूल कूट कूट के भरे थे
  • एक तरफ जहां मुगलिया सेना औरतों बच्चों वे अत्याचार करती थी. वही मराठा सेना औरतों को मां और बहन की नजर से देखते थे उनका सम्मान करते थे। जिस कारण से लोग स्वतः ही उनके साथ जुड़ते चले गए।

7. शिवाजी अचूक युद्ध नीति बनाने में माहिर थे, उनके पास एक युद्ध के लिए अलग अलग रडनीति तैयार रहती थी कि एक प्लान फेल हो जाये तो दूसरे वे अमल किया जाए।

8. शिवाजी ने गुजरात से लेकर आज के कर्नाटक तक समुद्री सीमा तक अपनी एक समुद्री सीमा भी बना रखी है। इसलिए शिवाजी को father of Indian Navy भी कहा जाता है।

9. शिवाजी से तंग आकर एक बार आदिल शाह ने अपने सबसे क्रूर सेनापति अफ़ज़ल खान को शिवाजी से निपटने के लिए भेजा। अफ़ज़ल खान जानता था कि शिवाजी को प्रत्यक्ष युद्ध मे हराना मुश्किल है. इसलिए उसने शिवाजी से समझौता करने का बहाना बनाकर अकेले बिना हथियार के बुलाया।

और गले मिलने के बहाने शिवाजी की पीठ में खंजर मारने की कोशिश की, लेकिन शिवाजी पहले से तैयार थे. उन्होंने लोहे की एक जैकेट अंदर से पहन रखी थी जिससे अफ़ज़ल खान का वॉर निष्क्रिय हो गया। फिर उन्होंने अपने हाथ मे पहने सिंहनख से अफ़ज़ल खान का पेट फ़ाड़ डाला। इससे पता चलता है कि शिवाजी एक नही कई प्लानिंग करके रखते थे ये उनकी सबसे अच्छी काबिलियत थी।

10. अफ़ज़ल खान के मरते ही मराठा उनकी सेना पे टूट पड़े और उसको क्षत विक्षत करके पूरा मनोबल तोड़ दिया और प्रतापगढ़ किला जीत लिया।

11. शिवाजी हालात के हिसाब से निर्णय लेते थे। एक बार अपनी कमजोर स्थिति को भापकर औरंगजेब के अधीन मिर्जा राजा जयसिंह से समझौता के तहत अपने 23 किले मुगलो को सौप दिए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर अपनी ताकत को संगठित किया। फिर उनको वापस जीतने की योजना पे लग गए।

छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी जानकारियां

12. छत्रपति शिवाजी एक वीर योद्धा के साथ साथ एक महान राजनीतिज्ञ और शाशक भी थे. जिसके कारण उन्हें “जाडता राजा” यानि जनता का राजा कहा जाता है।

13. मिर्जा राजा जयसिंह से पुरातन की संधि में 23 किले हारने के बाद भी शिवाजी महाराज रुके नही अगले कुछ साल के भीतर 360 किलों पे फिर भगवा लहरा दिया। हार और जीत के बाद न रुके न हताश हुए बस अगली योजना पे काम शुरू कर देते थे वो।

14. छत्रपति शिवाजी महाराज किसी धर्म के खिलाफ नही थे उनका युद्ध विदेशी मुगलों से था और इसीलिए उनके सिपहसालारों में कई मुसलमान योद्धा थे जो शिवाजी पे जान न्यौछावर करने को हर समय तत्पर रहते थे।

15. सन 1646 में 4 किलों और 2000 सैनिकों से शुरुआत करने वाले मराठा नायक शिवाजी की मृत्यु के समय सन 1680 तक ये संख्या एक लाख सैनिक औऱ 360 से अधिक किले उनके पास हो चुके थे। 5 अप्रैल 1680 को इस नायक की स्वाथ्य खराब होने की वजह से 52 वर्ष की अलप आयु में निधन हो गया।

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