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एकाग्रता कैसे बढ़ाये?

मन की एकाग्रता (एकाग्र शक्ति) बढ़ाने के उपाय

क्या आपके पास प्रबल एकाग्र शक्ति है ?
एकाग्रता कैसे बढ़ाये? इस प्रश्न पर लगभग 50000 विधार्थियों पे शोध किया गया और लगभग 99% छात्रों का जवाब में था। प्रबल एकाग्र शक्ति पाने के लिए क्या है “I” Factor आई तत्व?

आइये समझते हैं क्या है आई तत्व ” I  Factor”

हम में से सभी लोग फिल्म देखने जाते होंगे? जाहिर सी बात है ९८% लोग सिनेमा जाते हैं और लगभग ३ घंटे आँख गड़ाए बैठे रहते हैं। अगर फिल्म वाकई इंटरेस्टिंग है तो पता भी नहीं चलता कब इंटरवल हो गया, क्योंकि एकाग्रता की शक्ति उधर ज्यादा अग्रसर होती हैं।
इन तीन घंटो में हम शायद ही जान पाते हैं की हमारे ठीक बगल में कौन बैठा है ये कौन कब उठके चला गया। इसी तरह भारत पाकिस्तान का क्रिकेट मैच चल रहा हो तो खाना पीना छोड़कर एक तक टीवी में खोये रहते हैं।

ऐसा लगता है खुद को उसी में खो दिया हो। इसके विपरीत यदि पढाई कर रहे हो तो ध्यान(एकाग्रता) बटने में समय नहीं लगता है। कही एक किलोमीटर भी संगीत बज रहा हो तो मानो मस्तिष्क को बहाना मिल गया हो। और हमारा ध्यान तुरंत पढाई से हट जाता है।

इससे क्या पता चलता है ? यही की एकाग्रता किसी विषय में रूचि के अलावा कुछ भी नही है। यदि आप विषय में रूचि रखते हैं तो आपका ध्यान नहीं भटकेगा और अगर टॉपिक बोरिंग है तो फिर कोई आपके मस्तिष्क को एकाग्र नहीं कर सकता। किसी विषय को भली भांति सीखना या समझ में आना इस बात पे निर्भर करता है की हम कितनी मात्रा में अपना ध्यान एकाग्र उस विषय में करते हैं।

अब प्रश्न उठता है की बोरिंग विषय पे ध्यान कैसे लगाए ?

इसके लिए हम एक उदाहरण लेते हैं – कल्पना कीजिये की आपको पिछले हफ्ते हुई पार्टी (जिसमे आप भी शामिल थे) की कुछ फोटोग्राफ्स आपके पास आते हैं। आप सर्वप्रथम उसमे क्या देखेंगे ?

जाहिर है की उसमे आप अपनी तस्वीर देखने की कोशिश करेंगे और अपने मन को एकाग्र करने की कोशिश करेंगे। इसका मतलब जिस विषय में हम ज्यादा रूचि लेते हैं उसमे एकाग्रता का पैमाना भी अधिक होता है। अर्थात अगर हम विषय को स्वयं से जोड़ दें तो हम जल्दी सीख सकते हैं। यही है आई फैक्टर – हम जिस विषय के साथ अपने को सम्बंधित कर लेते हैं उसको सीखना और याद करना आसान हो जाता है।

कैसे करें आई तत्व का उपयोग ?

एक स्मृति टेस्ट (एकाग्रता शक्ति परिक्षण) के दौरान आठवीं कक्षा के छात्रों को दो समूहों में बांटा गया। दोनों को प्राचीन मानव के विकास के बारे में पढ़ाया गया बस दोनों ने पढ़ाने के तरीके में थोड़ा सा बदलाव किया गया।

पहले समूह को बताया गया : “आदिमानव गुफा में रहा करते थे। उन्होंने दो पत्थरों को आपस में रगड़कर आग की खोज की। पहनने के लिए वो पेड़ो की छाल व पत्तों का प्रयोग करते थे। ”

दूसरे समूह के विद्यार्थिओं को कहा गया: आप सोचिये की आप आदिमानव थे आप ही वो प्राचीन मानव है और ” आप गुफा में रहा करते थे। आपने दो पत्थरों को आपस में रगड़कर आग उत्पन्न की और आपके पास पहनने के लिए कपडे नहीं सिर्फ पेड़ों की छाल व पत्ते हुवा करते थे। ”

इसका परिणाम यह रहा की दूसरे समूह के बच्चों को यह पाठ जल्दी याद होगया और एक साल तक वो इस कहानी को ठीक ठीक दोहरापने की स्थिति में थे।

तो सीधा और सटीक सिद्धांत है की – कुछ भी आपको आसानी से सीखना है या याद रखना है तो उस विषय में खुद को शामिल करके देखिये। आप को बहुत ज्यादा आसानी होगी पाठ को याद करने में और वह भी लम्बे समय तक याद रह सकेगा आपको।

यह भी पढ़े:  याद करने का सही तरीका क्या है? इसमें आपको कुछ बेहद महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी जिससे की आप पाठ याद करने के सरलता का अनुभव करेंगे और एकाग्रता बढ़ाने के लिए बहुत समय और मेहनत की ज़रुरत होती है |  ।

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